सर्वोत्तम: सायंकाल (संध्या आरती बाद), प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त)। विशेष: एकादशी जागरण, नवरात्रि, जन्माष्टमी। नारद: कभी भी (भक्ति बंधन-रहित)। प्रकार: नाम-कीर्तन (सरलतम), भजन, संकीर्तन, आरती। नियम: मंदिर अनुमति, शोर न हो, भक्ति-भाव प्रधान। भागवत: कलियुग में कीर्तन = मुक्ति।
- 1नाम-कीर्तन: 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण...', 'ॐ नमः शिवाय' — सरलतम
- 2भजन: रचित पद — मीरा, तुलसीदास, सूरदास, कबीर
- 3संकीर्तन: सामूहिक कीर्तन — ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम
- 4आरती गीत: 'ॐ जय जगदीश हरे', देवता-विशिष्ट आरती
- 5शुद्ध हृदय और श्रद्धा भाव
- 6मंदिर प्रबंधन की अनुमति (विशेषतः बड़े मंदिर)
- 7अत्यधिक शोर न हो — आसपास के भक्तों/ध्यानियों को बाधा न दें
- 8वाद्य यंत्र मंदिर अनुमति से ही
- 9भक्ति-भाव प्रधान — प्रदर्शन नहीं
- 10कलियुग दोषों का भंडार है, परंतु एक महान गुण है — कृष्ण कीर्तन मात्र से मुक्ति।