मंदिर में भजन कीर्तन कब करना चाहिए?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
सर्वोत्तम: सायंकाल (संध्या आरती बाद), प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त)। विशेष: एकादशी जागरण, नवरात्रि, जन्माष्टमी। नारद: कभी भी (भक्ति बंधन-रहित)। प्रकार: नाम-कीर्तन (सरलतम), भजन, संकीर्तन, आरती। नियम: मंदिर अनुमति, शोर न हो, भक्ति-भाव प्रधान। भागवत: कलियुग में कीर्तन = मुक्ति।
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मंदिर भक्ति
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