पिंडदान: सामान्य मंदिर = अनुशंसित नहीं। विशिष्ट तीर्थ: गया विष्णुपद (सर्वोच्च), प्रयाग, काशी, रामेश्वरम। पिंड: चावल/जौ+तिल+शहद+घी। विधि: तर्पण (दक्षिण मुख) → पिंड कुश पर → मंत्र → ब्राह्मण भोजन। कब: पितृपक्ष, मृत्यु तिथि, अमावस्या। कौन: ज्येष्ठ पुत्र प्राथमिक।
- 1चावल/जौ का आटा + तिल + शहद + घी + दूध = पिंड (गोले) बनाना
- 2सामान्यतः 3 या 7 पिंड (पिता, दादा, परदादा + अन्य)
- 3पवित्र जल + तिल + कुश (दर्भ)
- 4दक्षिण दिशा मुख करके
- 5सव्य → अपसव्य (यज्ञोपवीत दाएँ कन्धे पर)
- 6कुश (दर्भ) पर पिंड रखना
- 7मंत्रों के साथ पितरों को आवाहन
- 8पिंड पर तिल + जल छिड़कना
- 9पिंडदान के बाद ब्राह्मण भोजन अनिवार्य
- 10ब्राह्मण = पितरों का प्रतिनिधि
- 11पितृपक्ष (भाद्रपद कृष्ण — 15 दिन) — सर्वोत्तम
- 12मृत्यु तिथि (वार्षिक श्राद्ध)
- 13अमावस्या
- 14ग्रहण काल
- 15ज्येष्ठ पुत्र (प्राथमिक)
- 16पुत्र न हो — पुत्री का पति, भतीजा, या कोई भी परिजन