शास्त्रीय आधार: अग्नि+देवता दोहरी साक्षी। गृह्य सूत्र: पवित्र स्थान = मंदिर उत्तम। विशेषता: दैवीय आशीर्वाद, सात्विक वातावरण, कम खर्च। मंदिर: तिरुपति, इस्कॉन, आर्य समाज — विवाह सेवा उपलब्ध। विधि: कन्यादान → सप्तपदी → प्रथम दर्शन। हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 = कानूनी मान्य।
- 1देवता का प्रत्यक्ष आशीर्वाद
- 2पवित्र वातावरण — सात्विक ऊर्जा
- 3सरल और आडम्बर-रहित (प्रायः)
- 4कम खर्च (बड़े मंडप/होटल की तुलना में)
- 5आध्यात्मिक शुरुआत — विवाह = 'धर्म' की शुरुआत
- 6अनेक प्रसिद्ध मंदिरों में विवाह सेवा उपलब्ध — तिरुपति (कल्याण मंडपम), मीनाक्षी (मदुरै), इस्कॉन, आर्य समाज मंदिर
- 7स्थानीय मंदिरों में भी — पुजारी/प्रबंधन से बात करें
- 8गुरुद्वारों (सिख) में 'आनन्द कारज' विवाह प्रचलित
- 9मंदिर से अनुमति और बुकिंग
- 10शुभ मुहूर्त निर्धारण
- 11पुरोहित (मंदिर का या स्वयं का)
- 12कन्यादान, मंगलसूत्र, सिंदूरदान
- 13सप्तपदी (सात फेरे — अग्नि के समक्ष)
- 14देवता को प्रणाम — दम्पति का प्रथम दर्शन
- 15प्रसाद वितरण