हाँ (सहायक): कॉर्टिसोल कमी (तनाव ↓), सेरोटोनिन वृद्धि (खुशी ↑), मेलाटोनिन (नींद ↑), DHEA (युवा हार्मोन ↑), थायरॉइड पर ॐ/भ्रामरी प्रभाव। योगिक: 7 चक्र = 7 ग्रंथि। जप = चिकित्सा विकल्प नहीं — सहायक।
- 1कॉर्टिसोल (तनाव हार्मोन) कमी: अनेक अध्ययनों में ध्यान/जप से कॉर्टिसोल स्तर में कमी देखी गई। कम तनाव = बेहतर हार्मोनल संतुलन।
- 2सेरोटोनिन (खुशी हार्मोन) वृद्धि: ध्यान से सेरोटोनिन बढ़ता है = मूड बेहतर, नींद सुधार, भूख नियंत्रण।
- 3मेलाटोनिन वृद्धि: ध्यान/जप से पीनियल ग्रंथि सक्रिय = मेलाटोनिन बढ़ता है = बेहतर नींद-जागने चक्र।
- 4DHEA वृद्धि: Dehydroepiandrosterone (युवा हार्मोन) ध्यान करने वालों में अधिक पाया गया।
- 5थायरॉइड संतुलन: कुछ अध्ययनों में ॐ उच्चारण और भ्रामरी प्राणायाम से थायरॉइड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया (ध्वनि कम्पन के कारण)।
- 6चक्र-ग्रंथि सम्बंध (योगिक दृष्टि): योग शास्त्र में शरीर के 7 चक्र 7 अंतःस्रावी ग्रंथियों से सम्बद्ध माने गए हैं। मंत्र जप चक्रों को सक्रिय करता है = सम्बंधित ग्रंथि संतुलित।