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वेदों में मूर्ति पूजा का विस्तृत विधान नहीं — वैदिक पूजा यज्ञ-प्रधान थी। मूर्ति पूजा आगम शास्त्रों और पुराण काल में विकसित हुई। यह वेद-विरुद्ध नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान का लोक-अनुकूलन है। इस पर सम्प्रदायों में मत भिन्नता है।
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