शिव→मत्स्येन्द्र→गोरक्ष। हठ योग (आसन/प्राणायाम/बंध/मुद्रा), कुंडलिनी, नाद योग, शाबर मंत्र (लोकभाषा), काया=ब्रह्मांड, जात-पात नहीं। आधुनिक Yoga = नाथ विरासत।
- 1हठ योग प्रधान: आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध — शरीर = साधना उपकरण। हठ योग प्रदीपिका = नाथ ग्रंथ।
- 2कुंडलिनी: हठ योग → कुंडलिनी जागरण = प्रमुख लक्ष्य।
- 3नाद योग: आंतरिक ध्वनि (अनाहत नाद) सुनना → समाधि।
- 4शाबर मंत्र: लोकभाषा मंत्र = नाथ विशेषता — सबके लिए सुलभ।
- 5काया साधना: 'काया ही ब्रह्मांड' — शरीर में ही सब कुछ।
- 6जात-पात भेद नहीं: गोरखनाथ = सभी वर्णों को दीक्षा।