प्रमुख ग्रंथ: नीलसरस्वती तंत्र, बृहन्नील तंत्र (साधना-मंत्र-पूजा विधि), प्राणतोषिणी तंत्र (100 नाम — ताराभाविनी आदि), कालीकुल सारोद्धार (उग्रतारा समान), तारा सहस्रनाम (1000 नामों में नीलसरस्वती), महाविद्या तरंगिणी (दस महाविद्याओं की गुरु)।
- 1नीलसरस्वती तंत्र: नाम से ही स्पष्ट है, इसमें उनकी साधना, मंत्र और पूजा विधि का विस्तार से वर्णन है।
- 2बृहन्नील तंत्र: इसमें भी उनकी साधना का विस्तृत वर्णन है।
- 3प्राणतोषिणी तंत्र (19वीं सदी): इसमें नील सरस्वती की 100 नामों वाली नामावली दी गई है, जिसमें उन्हें 'ताराभाविनी, कुलीनबाला' आदि नामों से संबोधित किया गया है।
- 4कालीकुल सारोद्धार: इसमें नील सरस्वती को उग्रतारा के समान बताया गया है।
- 5तारा सहस्रनाम: तारा देवी के 1000 नामों की सूची में 'नीलसरस्वती' नाम आता है।
- 6महाविद्या तरंगिणी: इसमें नील सरस्वती को दस महाविद्याओं की गुरु (आचार्या) कहा गया है।