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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम श्लोक का अर्थ

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ईशावास्य शांति मंत्र: वह (ब्रह्म) पूर्ण, यह (जगत/आत्मा) भी पूर्ण। पूर्ण से पूर्ण निकालें = पूर्ण शेष (∞-∞=∞)। अर्थ: ब्रह्म अनंत, सृष्टि ब्रह्म से भिन्न नहीं, आत्मा = ब्रह्म = पूर्ण। व्यावहारिक: आप जन्मजात पूर्ण हैं — बाहर से कुछ जोड़ने की आवश्यकता नहीं।

  1. 1अनंत गणित — ∞ - ∞ = ∞। ब्रह्म अनंत है — अनंत में से अनंत निकालने पर भी अनंत शेष। यह सांसारिक गणित से परे, आध्यात्मिक गणित है।
  2. 2सृष्टि = ब्रह्म — जगत ब्रह्म से भिन्न नहीं। जैसे समुद्र से लहर उठती है — लहर समुद्र का ही अंश है, समुद्र कम नहीं होता। सृष्टि ब्रह्म की लहर है।
  3. 3आत्मा = ब्रह्म — 'अदः' (वह/ब्रह्म) और 'इदम्' (यह/आत्मा) दोनों पूर्ण — अर्थात आत्मा और ब्रह्म में कोई कमी नहीं, दोनों एक ही पूर्ण हैं।
  4. 4पूर्णता का दर्शन — कुछ भी कम नहीं, कुछ भी अधिक नहीं। सब कुछ पूर्ण है — यह अद्वैत वेदांत का सार है।
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