पारद शिवलिंग = पारा + जड़ी-बूटी (रसशास्त्र विधि)। पूजा = 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का पुण्य। विशेष मंत्र: 'ॐ मृत्युभजाय नमः', 'ॐ नीलकंठाय नमः'। सफेद आसन, ईशान कोण में मुख, दाहिनी ओर घी का दीपक। तांत्रिक महत्व सर्वोच्च। नकली से सावधान — असली भारी और शीतल होता है।
- 1पारद शिवलिंग की पूजा = 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य (पौराणिक मान्यता)।
- 2इसमें शिव अपने वास्तविक रूप में विराजमान माने जाते हैं।
- 3इसे स्पर्श करने मात्र से पापों का क्षय होता है।
- 4अकेले पारद शिवलिंग की पूजा से शिव के पूरे परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी) की पूजा का फल मिलता है।
- 5सफेद कपड़े का आसन बिछाकर स्थापित करें।
- 6पूजक का मुख उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा की ओर हो।
- 7ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के बाद पूजा आरंभ करें।
- 8'ॐ मृत्युभजाय नमः'
- 9'ॐ नीलकंठाय नमः'
- 10'ॐ रुद्राय नमः'
- 11'ॐ शिवाय नमः'
- 12पंचामृत अभिषेक विशेष रूप से प्रभावशाली।
- 13जल की धारा सतत रखने की कम आवश्यकता (पारद स्वतः शीतल)।
- 14पारद शिवलिंग के दाहिनी ओर घी का दीपक अनिवार्य।
- 15मंत्र जप के बाद हाथ में चावल और फूल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करें — यह पूजा संपन्नता का संकेत है।