पशु योनि वाले पितर को श्राद्ध का अंश क्या बनकर मिलता है?
की चेकलिस्ट
पशु योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'तृण' (घास) बनकर मिलता है। पशु अन्न नहीं खा सकते — इसलिए मंत्र शक्ति से अन्न उनके योग्य घास में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।
- 1पितर की वर्तमान योनि = पशु योनि।
- 2कारण = कर्मों के वशीभूत (अर्थात् पूर्व कर्मों के फलस्वरूप)।
- 3श्राद्ध में अर्पित अन्न → 'तृण' (घास) में।
- 4तृण = घास, जो पशुओं का प्राकृतिक आहार है।
- 5पशु योनि के जीव अन्न नहीं खा सकते — उनका आहार घास है।
- 6इसलिए मंत्र शक्ति और श्रद्धा से अन्न उन्हीं के योग्य तृण रूप में रूपांतरित हो जाता है।
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श्रेणी
श्राद्ध दर्शन
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