पितृ दोष = पितरों की अतृप्ति से कुंडली दोष। कुंडली: 9वें भाव में राहु/केतु/शनि। लक्षण: संतान कष्ट, विवाह बाधा, कलह, आर्थिक कष्ट, सपने में दुखी पितर। निवारण: श्राद्ध, गया पिंडदान, नारायण बलि।
- 1पितरों का श्राद्ध/तर्पण न करना।
- 2पूर्वजों का अपमान/उपेक्षा।
- 3पूर्व जन्म के अधूरे पितृ कर्म।
- 4परिवार में किसी की अकाल मृत्यु और उचित संस्कार न होना।
- 59वें भाव (पितृ स्थान) में राहु/केतु/शनि।
- 6सूर्य पीड़ित (सूर्य = पिता का कारक)।
- 79वें भाव का स्वामी कमजोर/अशुभ ग्रहों से पीड़ित।
- 8परिवार में लगातार समस्याएँ (कलह, बीमारी, आर्थिक कष्ट)।
- 9संतान सुख न होना या संतान में कष्ट।
- 10विवाह में बार-बार बाधा।
- 11सपने में पितर दुखी/भूखे/प्यासे दिखें।
- 12तुलसी/पीपल बार-बार सूखे।
- 13कोई भी शुभ कार्य पूर्ण न हो।