पोंगल सूर्य पूजा: थाई पोंगल (मकर संक्रांति)। विधि: आँगन में कोलम → मिट्टी बर्तन में नया चावल+दूध+गुड़ उबालें → उफनने पर 'पोंगलो पोंगल!' → सूर्य को भोग ('ॐ सूर्याय नमः') → गन्ना-हल्दी-नारियल अर्पण → प्रसाद वितरण। कृषि-कृतज्ञता पर्व।
1भोगी पोंगल (दिन 1): पुरानी-बेकार वस्तुओं को जलाना (नवीनता का प्रतीक)।
2थाई/सूर्य पोंगल (दिन 2 — मुख्य): सूर्य पूजा।
3मट्टू पोंगल (दिन 3): गोपूजा (गाय-बैल पूजा)।
4कानुम पोंगल (दिन 4): परिवार मिलन।
5प्रातःकाल: स्नान करके नये वस्त्र धारण करें। घर के आँगन में कोलम (रंगोली) बनाएँ।
6पोंगल (चावल) पकाना: खुले आँगन में सूर्य की ओर मुख करके मिट्टी के बर्तन में नया चावल, दूध, गुड़ उबालें। जब दूध उफनकर बाहर आए — 'पोंगलो पोंगल!' का जयघोष करें (पोंगल = उबलना = समृद्धि का प्रतीक)।
7सूर्य अर्घ्य: तैयार पोंगल (मीठे चावल) का भोग सूर्य देव को अर्पित करें। 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र।