पूजा का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) है। प्रातः संध्या (सूर्योदय) गृहस्थों के लिए उत्तम है। सायंकाल संध्या दीप और आरती के लिए शुभ है। वार के अनुसार: सोमवार-शिव, मंगलवार-हनुमान, गुरुवार-विष्णु, शुक्रवार-लक्ष्मी। राहुकाल में पूजा उचित नहीं।
- 1वातावरण सात्विक और शांत
- 2मन सर्वाधिक एकाग्र
- 3पूजा का फल सहस्र गुना (शास्त्रोक्त)
- 4आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर
- 5अधिकांश लोगों की नित्य पूजा का समय
- 6सूर्योदय के समय पूर्व मुख पूजा विशेष शुभ
- 7'संध्यादीप' — सायंकाल दीप जलाना मंगलकारी
- 8इस समय देवता पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं (स्कंद पुराण)
- 9एकादशी — विष्णु पूजन; व्रत विशेष
- 10प्रदोष (त्रयोदशी) — शिव पूजन
- 11पूर्णिमा — सत्यनारायण व्रत, लक्ष्मी पूजन
- 12अमावस्या — पितृ पूजन
- 13चतुर्थी — गणेश पूजन
- 14अष्टमी — देवी पूजन
- 15राहुकाल — प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट; नया कार्य और पूजा उचित नहीं
- 16सूतक-पातक काल — मृत्यु या जन्म के 10-13 दिन
- 17ग्रहण काल — सामान्य जन पूजा न करें (केवल स्मरण करें)