पृथ्वी पर अर्पित अन्न पितरों को कैसे मिलता है?
की चेकलिस्ट
मत्स्य/स्कंद पुराण: पितर की योनि के अनुसार अन्न रूपांतरित होता है — देव योनि = अमृत, असुर योनि = भोग, पशु योनि = तृण (घास), सर्प योनि = वायु। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से यह सूक्ष्म रूपांतरण होता है।
- 1यदि पितर अपने श्रेष्ठ कर्मों के फलस्वरूप देवत्व को प्राप्त कर चुके हैं।
- 2श्राद्ध का अन्न उनके लिए 'अमृत' में परिवर्तित होकर मिलता है।
- 3श्राद्ध का अंश विविध भोगों के रूप में प्राप्त होता है।
- 4यदि कर्मों के वशीभूत होकर जीवात्मा ने पशु योनि प्राप्त की है।
- 5श्राद्ध का अंश उनके लिए 'तृण' (घास) बन जाता है।
- 6श्राद्ध का अंश 'वायु' बनकर उन्हें तृप्त करता है।
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