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पुनर्जन्म का प्रमाण क्या है शास्त्रों में

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शास्त्रीय प्रमाण: गीता 2.12, 2.22, 4.5 — कृष्ण ने स्पष्ट कहा कि बहुत जन्म बीत चुके। कठोपनिषद — आत्मा अमर। बृहदारण्यक — कर्मानुसार नया शरीर। योगसूत्र 2.12 — कर्माशय भावी जन्म निर्धारित करता है। भागवत में भरत मुनि के तीन जन्म प्रसिद्ध उदाहरण।

  1. 1गीता 2.12 — श्रीकृष्ण: 'न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्।।' — न मैं कभी नहीं था, न तू, न ये राजा। न आगे कभी नहीं होंगे — अर्थात हम सब पहले भी थे और आगे भी रहेंगे।
  2. 2गीता 2.22 — वस्त्र बदलने का उदाहरण — आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया लेती है।
  3. 3गीता 4.5 — 'बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन। तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप।।' — मेरे और तुम्हारे बहुत जन्म बीत चुके हैं। मैं सब जानता हूं, तू नहीं जानता।
  4. 4कठोपनिषद (1.2.18-19) — आत्मा न जन्मती है न मरती है; शरीर नष्ट होने पर आत्मा नष्ट नहीं होती।
  5. 5बृहदारण्यक उपनिषद (4.4.5-6) — कर्मानुसार आत्मा नया शरीर धारण करती है। जैसा कर्म, वैसी इच्छा; जैसी इच्छा, वैसा संकल्प; जैसा संकल्प, वैसा कर्म — यह चक्र चलता रहता है।
  6. 6जन्मजात प्रतिभा — कुछ बच्चे जन्मजात प्रतिभाशाली होते हैं — यह पूर्वजन्म के संस्कार माने जाते हैं।
  7. 7अकारण भय/आकर्षण — बिना कारण किसी स्थान/व्यक्ति से भय या आकर्षण — पूर्वजन्म की स्मृति हो सकती है।
  8. 8जातिस्मर — ऐसे लोग जो पूर्वजन्म की स्मृति रखते हैं (Ian Stevenson, Jim Tucker जैसे शोधकर्ताओं ने ऐसे मामलों का अध्ययन किया है)।
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