पुंसवन संस्कार कब करना चाहिए
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पुंसवन = द्वितीय संस्कार। कब: गर्भ के तीसरे मास में, शुभ नक्षत्र में, गर्भ स्पन्दन से पूर्व। उद्देश्य: गर्भस्थ शिशु की रक्षा, स्वस्थ विकास। विधि: हवन + प्रजापति/विष्णु प्रार्थना + वट शाखा रस (प्रतीकात्मक) + आशीर्वाद। प्रथम गर्भ में प्रमुख। गृह्यसूत्र में विधान।
- 1गर्भवती स्त्री स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहने।
- 2हवन — विशिष्ट मंत्रों से।
- 3वट (बरगद) वृक्ष की शाखा का रस या औषधि गर्भवती की दाहिनी नासिका में डालने का प्राचीन विधान है (आज यह प्रतीकात्मक रूप में किया जाता है)।
- 4प्रजापति, विष्णु, और गर्भ रक्षक देवताओं से प्रार्थना।
- 5गर्भवती का आशीर्वाद और मंगल कामना।
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