की चेकलिस्ट
पुंसवन = द्वितीय संस्कार। कब: गर्भ के तीसरे मास में, शुभ नक्षत्र में, गर्भ स्पन्दन से पूर्व। उद्देश्य: गर्भस्थ शिशु की रक्षा, स्वस्थ विकास। विधि: हवन + प्रजापति/विष्णु प्रार्थना + वट शाखा रस (प्रतीकात्मक) + आशीर्वाद। प्रथम गर्भ में प्रमुख। गृह्यसूत्र में विधान।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।