पुरश्चरण के दौरान हवन क्यों किया जाता है?
की चेकलिस्ट
पुरश्चरण में हवन के पाँच कारण: जप-दोष शुद्धि (सर्वप्रमुख — अग्नि सर्वशुद्धिकर), देवता-तृप्ति, पाँच तत्वों का संतुलन, मंत्र-ऊर्जा का ब्रह्मांड में प्रसार, देव-ऋण मुक्ति। गीता (4.24): हवन = ब्रह्मार्पण। संख्या = जप का 10वाँ। कुंड में 'मंत्र + स्वाहा' के साथ आहुति।
- 1अर्पण भी ब्रह्म, हवि भी ब्रह्म, अग्नि भी ब्रह्म, और आहुति देने वाला भी ब्रह्म — ब्रह्म-कर्म में समाधिस्थ व्यक्ति ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
- 2कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें (पलाश, आम्र, या अश्वत्थ की लकड़ी)
- 3मंत्र के साथ 'स्वाहा' जोड़कर हर आहुति
- 4सामग्री: देवता-अनुसार (तिल, जौ, घी, खीर, कमल)
- 5हवन के अंत में 'पूर्णाहुति' — सम्पूर्ण सामग्री की अंतिम आहुति
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