की चेकलिस्ट
पुरश्चरण में हवन के पाँच कारण: जप-दोष शुद्धि (सर्वप्रमुख — अग्नि सर्वशुद्धिकर), देवता-तृप्ति, पाँच तत्वों का संतुलन, मंत्र-ऊर्जा का ब्रह्मांड में प्रसार, देव-ऋण मुक्ति। गीता (4.24): हवन = ब्रह्मार्पण। संख्या = जप का 10वाँ। कुंड में 'मंत्र + स्वाहा' के साथ आहुति।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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