पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ क्यों?
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पुष्य=सबसे शुभ नक्षत्र(गुरु स्वामी)। गुरु=सोना कारक→पुष्य+सोना=दोहरी शुभता। 'पुष्य'=पोषण/वृद्धि। गुरुपुष्यामृत(गुरुवार+पुष्य)=सर्वोत्तम। सर्वार्थ सिद्धि नक्षत्र।
- 1गुरु = सोने का कारक। पुष्य = गुरु नक्षत्र → सोना + गुरु = दोहरी शुभता।
- 2'पुष्य' = पोषण/वृद्धि। इस नक्षत्र में खरीदा सोना बढ़ता है (मान्यता)।
- 3पुष्य = सर्वार्थ सिद्धि — इसमें किया कोई भी शुभ कार्य = सफल।
- 4गुरुपुष्यामृत योग = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र = सर्वोत्तम — इसमें सोना/संपत्ति = अत्यंत शुभ।
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