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रामकृष्ण ने काली को साक्षात माँ माना — दर्शन करते, बात करते, भावसमाधि में डूब जाते। उन्मत्त भक्ति — भोजन-नींद भूल जाते। काली दर्शन न होने पर तलवार उठाई — तभी दर्शन हुए। बाद में अद्वैत/इस्लाम/ईसाई साधना भी — 'जतो मत ततो पथ' (सब धर्म एक सत्य)।
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