रावण शिवभक्त, वेदज्ञ, महाशक्तिशाली — पर पापी कहलाया क्योंकि: अहंकार, सीता हरण (परस्त्री अपहरण), ऋषियों पर अत्याचार, शक्ति का दुरुपयोग। शिक्षा: भक्ति + अहंकार = विनाश। ज्ञान बिना सदाचार = व्यर्थ। भक्ति ≠ अधर्म की अनुमति।
- 1अहंकार — रावण का सबसे बड़ा दोष। वेद ज्ञान, शिव भक्ति, अपार शक्ति — सबने उसमें अहंकार भरा। कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास (शिव पुराण) इसी अहंकार का उदाहरण है।
- 2परस्त्री हरण — सीता हरण सबसे बड़ा पाप। सीता को बलपूर्वक अपहरण करना — यह स्त्री गरिमा का घोर उल्लंघन और महापाप है। यही उसके विनाश का मुख्य कारण बना।
- 3दूसरों पर अत्याचार — ऋषियों, मुनियों, देवताओं पर अत्याचार। नवग्रहों को बंदी बनाना। कुबेर (अपने भाई) से लंका छीनना।
- 4शक्ति का दुरुपयोग — ब्रह्मा का वरदान (देव-दानवों से अवध्यता) मिलने पर उसने मनुष्यों और प्राणियों पर अत्याचार किया। शक्ति = जिम्मेदारी, परंतु रावण ने शक्ति = अधिकार माना।
- 5भक्ति ≠ धर्म — यह सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है। केवल भक्ति (पूजा, तप) पर्याप्त नहीं; सदाचार, नैतिकता और धर्माचरण भी आवश्यक। भक्ति बिना सदाचार = अधूरा धर्म।
- 6ज्ञान + अहंकार = विनाश।
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