पत्नी, भाई, भतीजा, दामाद, नाती, भांजा, शिष्य, मित्र, ब्राह्मण — कोई भी कर सकता है। सर्वपितृ अमावस्या = किसी का भी किसी के लिए। श्रद्धा प्रधान — संतान न हो तो भी उपेक्षा न करें।
- 1पत्नी — पति का श्राद्ध पत्नी स्वयं कर सकती है (शास्त्र सम्मत)।
- 2भाई/भतीजा — सगे भाई या भतीजे।
- 3दामाद/नाती — बेटी का पति या बेटी का पुत्र।
- 4भांजा — बहन का पुत्र।
- 5शिष्य — गुरु का श्राद्ध शिष्य कर सकता है।
- 6मित्र/पड़ोसी — कोई भी श्रद्धालु व्यक्ति (अंतिम विकल्प)।
- 7ब्राह्मण/पंडित — धन देकर ब्राह्मण से करवा सकते हैं।
- 8गया पंडे — गया में पुरोहित भी किसी के पितरों का पिंडदान कर सकते हैं।