सर्प सूक्त में पृथ्वी, अंतरिक्ष, स्वर्गलोक, सूर्य-किरणों, जल, वृक्षों और वटों में रहने वाले समस्त ज्ञात-अज्ञात सर्पों को नमस्कार किया गया है।
- 1पृथ्वी पर (बिल आदि में) रहने वाले सर्प
- 2अंतरिक्ष में (वायुमंडल में) रहने वाले सर्प
- 3दिवि (स्वर्गलोक में) देवता रूप में स्थित सर्प
- 4आकाश के प्रकाशमान लोकों में वास करने वाले सर्प
- 5सूर्य की किरणों में वास करने वाले सर्प
- 6जलों में निवास करने वाले सर्प
- 7वृक्षों पर या वनस्पतियों में लिपटे सर्प
- 8वटों (बिल या गहरे गड्ढों) में शयन करने वाले सर्प