सर्प योनि वाले पितर को श्राद्ध कैसे प्राप्त होता है?
की चेकलिस्ट
सर्प आदि रेंगने वाली योनियों में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'वायु' बनकर तृप्ति देता है। मंत्र शक्ति से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।
- 1पितर की वर्तमान योनि = सर्प आदि रेंगने वाली योनियाँ।
- 2इसमें सांप और अन्य सरीसृप जीव शामिल हैं।
- 3श्राद्ध में अर्पित अन्न का अंश → 'वायु' में।
- 4वायु = हवा, जो सर्पों का आहार माना जाता है।
- 5सर्प योनि के जीव सामान्य अन्न ग्रहण नहीं कर सकते।
- 6वायु बनकर वह अंश उन्हें तृप्ति प्रदान करता है।
- 7देव योनि → अमृत
- 8असुर योनि → विविध भोग
- 9पशु योनि → तृण (घास)
- 10सर्प योनि → वायु
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श्राद्ध दर्शन
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