सतयुग से कलियुग तक धर्म कैसे बदला
की चेकलिस्ट
धर्म = चार पैरों का बैल (सत्य, दया, तप, दान)। सतयुग=4 पैर (ध्यान), त्रेता=3 (यज्ञ, राम), द्वापर=2 (पूजा, कृष्ण), कलियुग=1 (नाम जप)। कलियुग में धर्म क्षीण पर मोक्ष सरल — 'कलियुग केवल नाम अधारा।' कल्कि अवतार से पुनः सतयुग।
- 1अवधि: 17,28,000 वर्ष। मनुष्य आयु: ~1,00,000 वर्ष।
- 2सत्य, दया, तप, दान — चारों विद्यमान।
- 3सभी धर्मनिष्ठ। कोई पाप नहीं। वर्ण व्यवस्था नहीं — सब ब्राह्मण तुल्य।
- 4ध्यान/तपस्या प्रमुख साधना।
- 5अवधि: 12,96,000 वर्ष। मनुष्य आयु: ~10,000 वर्ष।
- 6सत्य, दया, तप विद्यमान; दान/शौच में कमी।
- 7यज्ञ प्रमुख साधना। वर्ण व्यवस्था प्रारंभ।
- 8राम अवतार — मर्यादा स्थापना।
- 9अवधि: 8,64,000 वर्ष। मनुष्य आयु: ~1,000 वर्ष।
- 10सत्य और दया विद्यमान; तप और दान क्षीण।
- 11पूजा-अर्चना प्रमुख साधना।
- 12कृष्ण अवतार — धर्म-अधर्म का भीषण संघर्ष (महाभारत)।
- 13अवधि: 4,32,000 वर्ष। मनुष्य आयु: ~100 वर्ष।
- 14केवल सत्य (वह भी क्षीण) शेष; दया, तप, दान लुप्तप्राय।
- 15भागवत 12.2 — राजा शोषक, ब्राह्मण अज्ञानी, स्त्रियां असुरक्षित, धन ही प्रतिष्ठा का आधार।
- 16नाम जप/मंत्र/भक्ति प्रमुख साधना।
- 17कलियुग का वरदान — सतयुग में जो लाखों वर्ष तप से मिलता, कलियुग में नाम स्मरण मात्र से मिलता है।
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