सीमंतोन्नयन = तृतीय संस्कार, आधुनिक 'गोद भराई'। कब: गर्भ के 6-8 मास में। विधि: हवन → पति द्वारा गर्भवती की माँग सँवारना (सीमन्त) → मधुर संगीत → सौभाग्यवती स्त्रियों का आशीर्वाद → फल-मिठाई-वस्त्र भेंट। गर्भवती का मनोबल, शिशु रक्षा, बुरी दृष्टि से सुरक्षा।
- 1तैयारी: गर्भवती स्नान करके श्रृंगार करे, नए वस्त्र पहने। शुभ स्थान पर आसन।
- 2हवन: अग्नि प्रज्वलन, गणपति पूजन, विशिष्ट मंत्रों से आहुतियाँ।
- 3सीमन्तोन्नयन (माँग भरना): पति, गर्भवती की माँग में सिन्दूर/कुमकुम लगाए और सेही (साही/Porcupine) के काँटे या दातून से (प्रतीकात्मक रूप में) माँग ऊपर की ओर सँवारे। मंत्र: 'भद्रं ते गर्भं...' आदि।
- 4वीणा वादन: कुछ गृह्यसूत्रों में गर्भवती के कान में वीणा या मधुर संगीत सुनाने का विधान — गर्भस्थ शिशु पर सकारात्मक प्रभाव।
- 5ब्राह्मण भोजन और दान।
- 6सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद।
- 7गर्भवती को फल, मिठाई, वस्त्र, आभूषण भेंट।