शिव का तृतीय नेत्र परम ज्ञान, कामना का दहन और महाप्रलय का प्रतीक है। यह आज्ञा चक्र (योग) का प्रतीक है। दो नेत्र सूर्य-चंद्र हैं, तृतीय नेत्र ज्ञानाग्नि है। त्रिनेत्र से शिव त्रिकाल (भूत, वर्तमान, भविष्य) देखते हैं।
- 1ज्ञान नेत्र: तृतीय नेत्र परम ज्ञान, विवेक और सत्य दर्शन का प्रतीक है। यह वह दृष्टि है जो माया से परे सत्य को देखती है।
- 2कामदहन: जब देवराज इंद्र के अनुरोध पर कामदेव ने शिव की समाधि भंग की, तब शिव जी ने अपना तृतीय नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए — यह अर्थ है कि ज्ञान की अग्नि से कामना (इच्छा) का नाश होता है।
- 3प्रलयकारी: अंत समय में शिव का तृतीय नेत्र खुलने पर महाप्रलय होता है — यह ब्रह्मांड के अंत और पुनर्निर्माण का प्रतीक है।