का सरल उत्तर
शिव का तृतीय नेत्र परम ज्ञान, कामना का दहन और महाप्रलय का प्रतीक है। यह आज्ञा चक्र (योग) का प्रतीक है। दो नेत्र सूर्य-चंद्र हैं, तृतीय नेत्र ज्ञानाग्नि है। त्रिनेत्र से शिव त्रिकाल (भूत, वर्तमान, भविष्य) देखते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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