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शिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?

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राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।

  1. 1महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप और दशांश हवन।
  2. 2सोमवार को शिवलिंग पर कच्चे दूध का अभिषेक।
  3. 3'ॐ नमः शिवाय' का नियमित जप रुद्राक्ष माला से।
  4. 4शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं।
  5. 5शनिवार/मंगलवार को काल भैरव की पूजा (भैरव शिव के अंश)।
  6. 6शिवलिंग पर कुश (दूब घास) से जलाभिषेक।
  7. 7'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप।
  8. 8भगवान गणेश (शिव पुत्र) की पूजा — गणपति बीज मंत्र जप।
  9. 9शिवलिंग पर सप्तधान्य (सात अनाज) चढ़ाना।
  10. 10केतु मंत्र 'ॐ कें केतवे नमः' जप के साथ शिव पूजा।
  11. 11रुद्राभिषेक करवाना सर्वोत्तम उपाय।
  12. 12पंचमुखी रुद्राक्ष या आठमुखी रुद्राक्ष (राहु) / नौमुखी रुद्राक्ष (केतु) धारण।
  13. 13प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) का नियमित पालन।
  14. 14काल सर्प दोष हो तो 'महाकाल' शिव (उज्जैन) या त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) में विशेष पूजा करवाना।
  15. 15शिव मंदिर में तिल का तेल दान।
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