विस्तृत उत्तर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु छाया ग्रह हैं जिनका प्रभाव अत्यंत तीव्र होता है। भगवान शिव की पूजा से इनके दुष्प्रभाव को शांत किया जा सकता है:
राहु दोष निवारण
- 1महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप और दशांश हवन।
- 2सोमवार को शिवलिंग पर कच्चे दूध का अभिषेक।
- 3'ॐ नमः शिवाय' का नियमित जप रुद्राक्ष माला से।
- 4शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं।
- 5शनिवार/मंगलवार को काल भैरव की पूजा (भैरव शिव के अंश)।
केतु दोष निवारण
- 1शिवलिंग पर कुश (दूब घास) से जलाभिषेक।
- 2'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप।
- 3भगवान गणेश (शिव पुत्र) की पूजा — गणपति बीज मंत्र जप।
- 4शिवलिंग पर सप्तधान्य (सात अनाज) चढ़ाना।
- 5केतु मंत्र 'ॐ कें केतवे नमः' जप के साथ शिव पूजा।
सामान्य उपाय (राहु-केतु दोनों हेतु)
- 1रुद्राभिषेक करवाना सर्वोत्तम उपाय।
- 2पंचमुखी रुद्राक्ष या आठमुखी रुद्राक्ष (राहु) / नौमुखी रुद्राक्ष (केतु) धारण।
- 3प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) का नियमित पालन।
- 4काल सर्प दोष हो तो 'महाकाल' शिव (उज्जैन) या त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) में विशेष पूजा करवाना।
- 5शिव मंदिर में तिल का तेल दान।
ध्यान रखें: ग्रह दोष निवारण के लिए किसी विद्वान ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर सटीक उपाय जानना उचित है।





