न्यास = शरीर के अंगों में शिव/मंत्र शक्ति की स्थापना। 'न्यास बिना जप निष्फल' — शास्त्र वचन। करन्यास: उंगलियों पर बीजाक्षर न्यस्त करें। षडंग न्यास: हृदय, शिर, शिखा, कवच, नेत्र, अस्त्र पर स्पर्श। पंचाक्षरी न्यास: न-मः-शि-वा-य = पंचतत्व-पंचांग पर। गुरु से सीखना सर्वोत्तम।
- 1अंगूठे — 'अंगुष्ठाभ्यां नमः' (दोनों अंगूठे आपस में मिलाएं)
- 2तर्जनी — 'तर्जनीभ्यां नमः'
- 3मध्यमा — 'मध्यमाभ्यां नमः'
- 4अनामिका — 'अनामिकाभ्यां नमः'
- 5कनिष्ठा — 'कनिष्ठिकाभ्यां नमः'
- 6करतल-करपृष्ठ — 'करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः'
- 7'हृदयाय नमः' — हृदय स्पर्श
- 8'शिरसे स्वाहा' — मस्तक स्पर्श
- 9'शिखायै वषट्' — शिखा (चोटी) स्पर्श
- 10'कवचाय हुम्' — दोनों भुजाओं को क्रास कर स्पर्श
- 11'नेत्रत्रयाय वौषट्' — तीन नेत्रों (दो नेत्र + भ्रूमध्य) का स्पर्श
- 12'अस्त्राय फट्' — तालि बजाएं
- 13'न' — पृथ्वी तत्व — पैरों पर
- 14'मः' — जल तत्व — जंघाओं पर
- 15'शि' — अग्नि तत्व — नाभि पर
- 16'वा' — वायु तत्व — हृदय पर
- 17'य' — आकाश तत्व — मस्तक पर