शिव पूजा में वर्जित: तुलसी (निषिद्ध), केवड़ा (शापित), टूटे पुष्प, भैंस का दूध, बासी भोग। जूते पहनकर न बैठें। पूजा में बात/हँसी नहीं। पूर्ण परिक्रमा नहीं — केवल अर्धपरिक्रमा। सूतक/ग्रहण में पूजा नहीं। क्रोध-लोभ की अवस्था में पूजा व्यर्थ।
- 1तुलसी — शिवलिंग पर तुलसी कभी न चढ़ाएँ (विष्णु-प्रिय, शिव पुराण में स्पष्ट निषेध)
- 2केवड़ा (केतकी) — शापित पुष्प, सख्त वर्जित
- 3टूटे/मुरझाए पुष्प — वर्जित
- 4भैंस का दूध — तामसिक, वर्जित
- 5बासी/जूठा भोग — वर्जित
- 6जूते-चप्पल पहनकर पूजा — वर्जित
- 7पूजा के दौरान बात करना/हँसना — मन की एकाग्रता भंग होती है
- 8पीठ करके बैठना — शिवलिंग की ओर पीठ न करें
- 9शिवलिंग को छूना (महिलाएँ) — कुछ परंपराओं और मंदिरों में निषेध (यह क्षेत्रीय परंपरा-भेद है)
- 10अर्धपरिक्रमा का उल्लंघन — शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें; केवल अर्धपरिक्रमा करें (जलधारी पार न करें)
- 11सूतक/पातक में पूजा — अशौच काल में स्वयं पूजा न करें
- 12ग्रहण काल में — ग्रहण-स्पर्श से मोक्ष-काल तक पूजा बंद
- 13क्रोध, लोभ, मद की अवस्था में पूजा अनुचित
- 14किसी की बुराई सोचते हुए पूजा — फल नहीं