बेलपत्र: न्यूनतम 1 त्रिदल, शुभ 3/5/7/11/21/108। जितने अधिक दल उतना उत्तम। उल्टा (चिकना भाग शिवलिंग पर), डंठल तोड़कर, कटा-फटा वर्जित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं...' मंत्र। जल धारा साथ अनिवार्य। पुराना धोकर पुनः मान्य। तोड़ना: चतुर्थी/अष्टमी/नवमी/अमावस्या/सोमवार वर्जित।
- 1न्यूनतम 1 त्रिदल: एक बेलपत्र (तीन पत्तियों का एक समूह = त्रिदल) भी श्रद्धा से चढ़ाने पर शिव प्रसन्न होते हैं।
- 2शुभ संख्या: 3, 5, 7, 11, 21, 51, 101 बेलपत्र।
- 3विशेष: शीघ्र विवाह हेतु 108 बेलपत्र। महामृत्युंजय/रुद्राभिषेक में 108 या 1008 भी।
- 4बेलपत्र 3 से 11 दलों (पत्तियों) तक के होते हैं — जितने अधिक दल, उतना उत्तम।
- 5उल्टा चढ़ाएँ — चिकनी सतह शिवलिंग की ओर।
- 6अनामिका, अंगूठे और मध्यमा से पकड़कर।
- 7डंठल तोड़कर चढ़ाएँ।
- 8कटा-फटा, कीड़ा लगा बेलपत्र न चढ़ाएँ।
- 9जल की धारा साथ में अवश्य चढ़ाएँ।
- 10पुराना बेलपत्र धोकर पुनः चढ़ाना मान्य — बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता।