विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर बेलपत्र (बिल्वपत्र) चढ़ाने की संख्या और नियम शिव पुराण और बिल्वाष्टक में वर्णित हैं।
संख्या
- ▸न्यूनतम 1 त्रिदल: एक बेलपत्र (तीन पत्तियों का एक समूह = त्रिदल) भी श्रद्धा से चढ़ाने पर शिव प्रसन्न होते हैं।
- ▸शुभ संख्या: 3, 5, 7, 11, 21, 51, 101 बेलपत्र।
- ▸विशेष: शीघ्र विवाह हेतु 108 बेलपत्र। महामृत्युंजय/रुद्राभिषेक में 108 या 1008 भी।
- ▸बेलपत्र 3 से 11 दलों (पत्तियों) तक के होते हैं — जितने अधिक दल, उतना उत्तम।
मंत्र
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥'
(तीन पत्तियों वाला, त्रिगुण स्वरूप, त्रिनेत्र शिव का, त्रिशूलधारी, तीन जन्मों के पापों का नाश करने वाला — यह बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।)
नियम
- ▸उल्टा चढ़ाएँ — चिकनी सतह शिवलिंग की ओर।
- ▸अनामिका, अंगूठे और मध्यमा से पकड़कर।
- ▸डंठल तोड़कर चढ़ाएँ।
- ▸कटा-फटा, कीड़ा लगा बेलपत्र न चढ़ाएँ।
- ▸जल की धारा साथ में अवश्य चढ़ाएँ।
- ▸पुराना बेलपत्र धोकर पुनः चढ़ाना मान्य — बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता।
तोड़ने के नियम
चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रान्ति काल और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें — पहले से तोड़कर रख लें।





