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शिव उपासना📜 शिव पुराण, बिल्वाष्टक, लिंग पुराण2 मिनट पठन

शिवलिंग पर कितनी बेलपत्र एक बार में चढ़ानी चाहिए

संक्षिप्त उत्तर

बेलपत्र: न्यूनतम 1 त्रिदल, शुभ 3/5/7/11/21/108। जितने अधिक दल उतना उत्तम। उल्टा (चिकना भाग शिवलिंग पर), डंठल तोड़कर, कटा-फटा वर्जित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं...' मंत्र। जल धारा साथ अनिवार्य। पुराना धोकर पुनः मान्य। तोड़ना: चतुर्थी/अष्टमी/नवमी/अमावस्या/सोमवार वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर बेलपत्र (बिल्वपत्र) चढ़ाने की संख्या और नियम शिव पुराण और बिल्वाष्टक में वर्णित हैं।

संख्या

  • न्यूनतम 1 त्रिदल: एक बेलपत्र (तीन पत्तियों का एक समूह = त्रिदल) भी श्रद्धा से चढ़ाने पर शिव प्रसन्न होते हैं।
  • शुभ संख्या: 3, 5, 7, 11, 21, 51, 101 बेलपत्र।
  • विशेष: शीघ्र विवाह हेतु 108 बेलपत्र। महामृत्युंजय/रुद्राभिषेक में 108 या 1008 भी।
  • बेलपत्र 3 से 11 दलों (पत्तियों) तक के होते हैं — जितने अधिक दल, उतना उत्तम।

मंत्र

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्।

त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥'

(तीन पत्तियों वाला, त्रिगुण स्वरूप, त्रिनेत्र शिव का, त्रिशूलधारी, तीन जन्मों के पापों का नाश करने वाला — यह बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।)

नियम

  • उल्टा चढ़ाएँ — चिकनी सतह शिवलिंग की ओर।
  • अनामिका, अंगूठे और मध्यमा से पकड़कर।
  • डंठल तोड़कर चढ़ाएँ।
  • कटा-फटा, कीड़ा लगा बेलपत्र न चढ़ाएँ।
  • जल की धारा साथ में अवश्य चढ़ाएँ।
  • पुराना बेलपत्र धोकर पुनः चढ़ाना मान्य — बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता।

तोड़ने के नियम

चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रान्ति काल और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें — पहले से तोड़कर रख लें।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, बिल्वाष्टक, लिंग पुराण
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