विस्तृत उत्तर
न्यायालय/विवाद/शत्रु विजय हेतु शिव के कई स्तोत्रों और मंत्रों की परम्परा प्रचलित है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये परम्परागत धार्मिक मान्यताएँ हैं — किसी विशिष्ट स्तोत्र से कानूनी विजय की कोई गारन्टी शास्त्रों में नहीं दी गई है। किन्तु श्रद्धा और मानसिक बल हेतु भक्त इनका जप करते हैं।
प्रचलित स्तोत्र/मंत्र
1कालभैरवाष्टक (आदि शंकराचार्य कृत)
कालभैरव = न्याय के देवता, काशी के कोतवाल। 'देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपंकजम्...' — शत्रु भय नाश, न्याय प्राप्ति हेतु अत्यन्त प्रभावी माना जाता है।
2शिव ताण्डव स्तोत्रम् (रावण कृत)
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले...' — शक्ति, निर्भयता और विजय हेतु। मान्यता: रावण ने यह स्तोत्र शिव से अपराजेय शक्ति प्राप्त करने हेतु रचा।
3महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
— सभी प्रकार के बन्धन (कानूनी सहित) से मुक्ति और रक्षा हेतु।
4रुद्राष्टक (गोस्वामी तुलसीदास कृत)
नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्...' — शिव कृपा, विघ्न नाश।
5शत्रु विजय हेतु प्रचलित मंत्र
'ॐ नमो भगवते रुद्राय विष्णवे मृत्यु नाशाय मम शत्रुन् हन हन दह दह पच पच विध्वंसय विध्वंसय उत्साटय उत्साटय ॐ नमः शिवाय' — (तांत्रिक परम्परा, सभी शाखाओं में मान्य नहीं)
महत्वपूर्ण
- ▸कोई भी स्तोत्र/मंत्र वकील और कानूनी तैयारी का विकल्प नहीं है।
- ▸मंत्र जप से मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और धैर्य मिलता है — जो किसी भी संकट में सहायक।
- ▸सत्य पक्ष पर हों, तभी ईश्वर कृपा की अपेक्षा करें।
- ▸गुरु परामर्श से ही विशेष अनुष्ठान करें।





