श्रीसूक्त विधि: पूर्वाभिमुख, श्वेत/लाल आसन, चौकी पर कुमकुम स्वस्तिक, श्रीयंत्र/दक्षिणावर्ती शंख/महालक्ष्मी प्रतिमा, गुलाब-कमल अर्चना, 15 ऋचाओं का पाठ, घी-तिल-कमलगट्टे का हवन।
- 1साधक को पूर्वाभिमुख होकर स्वच्छ श्वेत या लाल आसन पर बैठना चाहिए।
- 2लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर अष्टगंध या कुमकुम से स्वस्तिक बनाना चाहिए।
- 3तदनंतर, श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, एकाक्षी श्रीफल अथवा महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर गुलाब और कमल के पुष्पों से उनकी अर्चना करनी चाहिए।
- 4'हिरण्यवर्णां हरिणीं' से आरंभ कर श्रीसूक्त की पंद्रह ऋचाओं का शुद्ध उच्चारण करते हुए घी, तिल और कमलगट्टे से आहुति (हवन) देने पर व्यापार में वृद्धि, ऋणों से मुक्ति और घर में चिरस्थायी सुख-शांति स्थापित होती है।