विस्तृत उत्तर
ऋग्वेद के श्रीसूक्त का पाठ दीपावली के पांच पर्वों (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज) के दौरान करना अमोघ फलदायी माना गया है।
अनुष्ठान की शास्त्रीय विधि के अनुसार:
- ▸साधक को पूर्वाभिमुख होकर स्वच्छ श्वेत या लाल आसन पर बैठना चाहिए।
- ▸लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर अष्टगंध या कुमकुम से स्वस्तिक बनाना चाहिए।
- ▸तदनंतर, श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, एकाक्षी श्रीफल अथवा महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर गुलाब और कमल के पुष्पों से उनकी अर्चना करनी चाहिए।
- ▸'हिरण्यवर्णां हरिणीं' से आरंभ कर श्रीसूक्त की पंद्रह ऋचाओं का शुद्ध उच्चारण करते हुए घी, तिल और कमलगट्टे से आहुति (हवन) देने पर व्यापार में वृद्धि, ऋणों से मुक्ति और घर में चिरस्थायी सुख-शांति स्थापित होती है।





