सोमयाग क्या है और कैसे किया जाता है
की चेकलिस्ट
सोमयाग = सोमरस से आहुति वाला श्रेष्ठ वैदिक यज्ञ। 7 प्रकार: अग्निष्टोम सबसे मूल। 16 ऋत्विज्, वसन्त ऋतु में। क्रम: दीक्षा → सोम क्रय → सोमरस निष्कासन (तीन सवन) → सामगान → आहुति → सोमपान → दक्षिणा → अवभृथ स्नान। राजसूय, अश्वमेध भी सोमयाग श्रेणी। आज अत्यन्त दुर्लभ।
- 1अग्निष्टोम (सबसे मूलभूत)
- 2अत्यग्निष्टोम
- 3उक्थ
- 4षोडशी
- 5वाजपेय
- 6अतिरात्र
- 7आप्तोर्याम
- 8दीक्षा: यजमान और पत्नी व्रत लेते हैं।
- 9प्रवर्ग्य और उपसद: प्रारम्भिक अनुष्ठान।
- 10सोम क्रय: सोमलता का विधिपूर्वक क्रय।
- 11सुत्या (सोमरस निष्कासन): पत्थरों (ग्रावन्) से सोमलता कूटकर रस निकालना — यह तीन सवनों (प्रातः, माध्यन्दिन, सायं) में होता है।
- 12प्रत्येक सवन में सामगान, शस्त्र पाठ (ऋग्वेदी), और आहुति।
- 13सोमपान: ऋत्विज् और यजमान सोमरस का पान।
- 14दक्षिणा: यजमान ऋत्विजों को दक्षिणा देता है (गायें, सोना, वस्त्र आदि)।
- 15अवभृथ स्नान: समापन स्नान।
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