आगम: 'देवता आएं, राक्षस भागें।' उद्देश्य: देवता आवाहन, नकारात्मकता नाश, मन एकाग्र, ॐ ध्वनि, चक्र सक्रियता, वातावरण शुद्धि। बायें हाथ घंटी, दायें पूजा। आरती/प्राण प्रतिष्ठा में अनिवार्य।
- 1देवता आवाहन: घंटी ध्वनि = देवता को बुलाना — 'मैं पूजा आरंभ कर रहा हूं।'
- 2नकारात्मकता नाश: घंटी ध्वनि = नकारात्मक/तामसिक शक्तियां भागें। तंत्र: भूत-प्रेत घंटी ध्वनि सहन नहीं कर पाते।
- 3मन एकाग्र: तीव्र ध्वनि = मन वर्तमान में — विचार शून्य।
- 4'ॐ' ध्वनि: घंटी गूंज = 'ॐ' के निकट — ब्रह्म नाद।
- 5चक्र सक्रियता: ध्वनि कंपन = शरीर चक्रों पर प्रभाव।
- 6वातावरण शुद्धि: ध्वनि तरंगें = वायु शुद्ध।