काले तिल: विष्णु स्वेद से उत्पन्न (पवित्र), पाप नाशक (गरुड़ पुराण), असुर विरोधी (रक्षा), शनि सम्बद्ध (पितृ पक्ष), काला=पितृ लोक/दक्षिण/यम। सफेद तिल तर्पण में नहीं — देव कर्म में। साबुत, शुद्ध।
- 1विष्णु जन्म: पुराणों में तिल को भगवान विष्णु के स्वेद (पसीने) से उत्पन्न माना गया है — इसलिए अत्यंत पवित्र। तिल सहित तर्पण = विष्णु कृपा सहित।
- 2पाप नाशक: गरुड़ पुराण: 'तिलैस्तर्पयते यस्तु पितॄन्...' — तिल से तर्पण करने से पितरों की तृप्ति होती है और दाता के पाप नष्ट होते हैं।
- 3असुर/राक्षस विरोधी: मान्यता है कि तिल में असुर विरोधी शक्ति है। श्राद्ध में तिल प्रयोग से राक्षस/नकारात्मक शक्तियाँ पितरों के भोग को नष्ट नहीं कर पातीं — तिल रक्षा करता है।
- 4शनि ग्रह: काला तिल शनि ग्रह से सम्बद्ध। पितृ पक्ष = शनि सम्बंधित काल। काले तिल = शनि प्रसन्नता + पितर तृप्ति।
- 5काला रंग = पितृ लोक: काला रंग = पितृ लोक/दक्षिण दिशा/यमराज से सम्बद्ध। काले तिल = पितरों तक पहुँचने का माध्यम।