दक्षिणाचार: सात्विक, पंचमकार प्रतीकात्मक, सामान्य भक्त, वैदिक-सम्मत। वामाचार: उग्र, पंचमकार यथार्थ, उन्नत साधक, श्मशान, गुरु अनिवार्य। महानिर्वाण: कलियुग में वामाचार = केवल दीक्षित। सामान्य = दक्षिणाचार। वैष्णव = शुद्ध दक्षिणाचार।
- 1सात्विक, शुद्ध, वैदिक-सम्मत।
- 2पंचमकार का प्रतीकात्मक प्रयोग (मदिरा = अमृत, मांस = जिह्वा संयम, मत्स्य = प्राणायाम, मुद्रा = ध्यान, मैथुन = कुण्डलिनी-शिव मिलन)।
- 3सामान्य भक्तों के लिए उपयुक्त।
- 4मंत्र, पूजा, हवन, ध्यान = प्रमुख।
- 5उग्र, गोपनीय, विवादास्पद।
- 6पंचमकार का यथार्थ (literal) प्रयोग — मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन।
- 7अत्यंत उन्नत साधकों के लिए — सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं।
- 8श्मशान साधना, रात्रि पूजा, उग्र देवता।
- 9गुरु दीक्षा = अत्यंत अनिवार्य।