तंत्र में यंत्र पर बैठकर जप करने का क्या विधान है
की चेकलिस्ट
यंत्रासन: ताँबे/चाँदी/भोजपत्र यंत्र को आसन में रखकर बैठकर जप। यंत्र ऊर्जा सीधे शरीर में। श्रीयंत्र/देवता यंत्र। प्राण प्रतिष्ठित हो, गुरु आदेश अनिवार्य, अशुद्ध अवस्था वर्जित। वैकल्पिक: यंत्र सामने रखकर ध्यान + जप। उन्नत साधना — सामान्य भक्तों हेतु नहीं।
- 1श्रीयंत्र — श्रीविद्या साधना में साधक श्रीयंत्र पर बैठता है।
- 2देवता विशिष्ट यंत्र — काली यंत्र, दुर्गा यंत्र, गणेश यंत्र आदि।
- 3सिद्ध यंत्र — गुरु द्वारा प्राण प्रतिष्ठित।
- 4यंत्र को लाल/श्वेत ऊनी वस्त्र में लपेटकर आसन बनाएँ।
- 5आसन पर बैठकर देवता का ध्यान करें।
- 6यंत्र सम्बन्धित मंत्र जप।
- 7मान्यता: यंत्र = देवता का सूक्ष्म शरीर, बैठने से साधक का शरीर यंत्र ऊर्जा से आवेशित।
- 8प्राण प्रतिष्ठित यंत्र ही प्रयोग करें।
- 9गुरु आदेश के बिना न करें — यह उन्नत साधना है।
- 10यंत्र की नित्य पूजा अनिवार्य — उपेक्षा अशुभ।
- 11अशुद्ध अवस्था में यंत्र पर न बैठें।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
तंत्र साधना
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।