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चेकलिस्ट

तंत्र साधना में दम्पति की संयुक्त साधना का क्या विधान है?

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तंत्र में पति = भैरव, पत्नी = भैरवी। संयुक्त साधना: दक्षिणाचार (सात्विक — एक माला से जप), कौल पद्धति (दीक्षित दम्पति), गृहस्थ साधना (संयुक्त पूजा)। शर्तें: एक गुरु-दीक्षा, सात्विक आहार, गोपनीयता। लाभ: द्विगुण शक्ति, गृहस्थ शांति।

  1. 1पति-पत्नी एक साथ बैठकर मंत्र जप करें
  2. 2पत्नी बायीं ओर बैठे (शक्ति स्थान)
  3. 3एक ही माला से दोनों जप करें (माला पत्नी धारण करे, दोनों जपें)
  4. 4एक ही दीपक और धूप से पूजा
  5. 5नित्य संध्या काल में संयुक्त ध्यान
  6. 6भैरव-भैरवी चक्र पूजा
  7. 7पंचमकार विधि (प्रतीकात्मक या यथार्थ — गुरु-निर्देश अनुसार)
  8. 8यह साधना केवल गुरु-दीक्षा प्राप्त दम्पति ही कर सकते हैं
  9. 9प्रातःकाल संयुक्त पूजा
  10. 10शिव-पार्वती या लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त आराधना
  11. 11अमावस्या/पूर्णिमा पर विशेष संयुक्त जप
  12. 12दोनों को एक ही गुरु से दीक्षा प्राप्त होनी चाहिए (महानिर्वाण तंत्र)
  13. 13साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन (कम से कम साधना की अवधि तक)
  14. 14दोनों का आहार सात्विक हो
  15. 15साधना का विवरण किसी को न बताएँ (गोपनीयता अनिवार्य)
  16. 16परस्पर श्रद्धा और सम्मान अनिवार्य
  17. 17शिव-शक्ति ऐक्य का अनुभव
  18. 18दम्पति का बंधन सुदृढ़
  19. 19साधना में द्विगुण शक्ति
  20. 20गृहस्थ जीवन में शांति और समृद्धि
  21. 21संतान को आध्यात्मिक संस्कार
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