विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में दम्पति की संयुक्त साधना का विशेष और गहन विधान बताया गया है। तंत्र का मूल सिद्धांत शिव-शक्ति ऐक्य पर आधारित है, इसलिए पति-पत्नी की संयुक्त साधना को अत्यन्त शक्तिशाली माना गया है।
सिद्धांत
कुलार्णव तंत्र: तंत्र में पुरुष = भैरव (शिव तत्व) और स्त्री = भैरवी (शक्ति तत्व)। जब दोनों मिलकर साधना करते हैं, तो शिव-शक्ति ऐक्य का सूक्ष्म स्तर पर अनुभव होता है।
संयुक्त साधना के प्रकार
1दक्षिणाचार पद्धति (सात्विक — सर्वसुलभ)
- ▸पति-पत्नी एक साथ बैठकर मंत्र जप करें
- ▸पत्नी बायीं ओर बैठे (शक्ति स्थान)
- ▸एक ही माला से दोनों जप करें (माला पत्नी धारण करे, दोनों जपें)
- ▸एक ही दीपक और धूप से पूजा
- ▸नित्य संध्या काल में संयुक्त ध्यान
2कौल पद्धति (उन्नत — दीक्षित दम्पतियों के लिए)
- ▸भैरव-भैरवी चक्र पूजा
- ▸पंचमकार विधि (प्रतीकात्मक या यथार्थ — गुरु-निर्देश अनुसार)
- ▸यह साधना केवल गुरु-दीक्षा प्राप्त दम्पति ही कर सकते हैं
3गृहस्थ तांत्रिक साधना (सामान्य)
- ▸प्रातःकाल संयुक्त पूजा
- ▸शिव-पार्वती या लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त आराधना
- ▸अमावस्या/पूर्णिमा पर विशेष संयुक्त जप
नियम और शर्तें
- ▸दोनों को एक ही गुरु से दीक्षा प्राप्त होनी चाहिए (महानिर्वाण तंत्र)
- ▸साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन (कम से कम साधना की अवधि तक)
- ▸दोनों का आहार सात्विक हो
- ▸साधना का विवरण किसी को न बताएँ (गोपनीयता अनिवार्य)
- ▸परस्पर श्रद्धा और सम्मान अनिवार्य
लाभ
- ▸शिव-शक्ति ऐक्य का अनुभव
- ▸दम्पति का बंधन सुदृढ़
- ▸साधना में द्विगुण शक्ति
- ▸गृहस्थ जीवन में शांति और समृद्धि
- ▸संतान को आध्यात्मिक संस्कार
सावधानी
यदि दम्पति में से कोई एक अनिच्छुक हो, तो जबरदस्ती संयुक्त साधना न करें। ऐसे में व्यक्तिगत साधना ही उचित है।