तुलसी विवाह के फायदे: (1) कन्यादान का सर्वोच्च पुण्य, (2) पूर्व जन्म के पाप नाश और वैकुंठ लोक प्राप्ति, (3) 1000 अश्वमेध + 100 राजसूय यज्ञों का फल, (4) लक्ष्मी का स्थायी वास, वास्तु दोष नाश, दांपत्य माधुर्य।
- 1कन्यादान का सर्वोच्च पुण्य: नि:संतान दंपति को एक कन्या के कन्यादान का सर्वोच्च पुण्य प्राप्त होता है।
- 2पापों का शमन एवं मोक्ष: पूर्व जन्मों के संचित घोर पाप भस्म हो जाते हैं। जो तुलसी से श्रीहरि की पूजा करता है, उसे यमदूतों का सामना नहीं करना पड़ता और वह वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है।
- 3अश्वमेध यज्ञ का फल: देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी-विवाह में यजमान बनने अथवा दर्शन मात्र से 1000 अश्वमेध यज्ञों और 100 राजसूय यज्ञों के समान पुण्य।
- 4सौभाग्य एवं वास्तु दोष निवारण: जहाँ तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है, वहाँ माता लक्ष्मी का स्थायी वास, घर के वास्तु दोष नष्ट, परिवार में कलह शांत, दरिद्रता दूर और दांपत्य जीवन में माधुर्य।