विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण (कार्तिक माहात्म्य) और स्कंद पुराण में तुलसी-शालिग्राम विवाह के निम्नलिखित फल बताए गए हैं:
१. कन्यादान का सर्वोच्च पुण्य: नि:संतान दंपति को एक कन्या के कन्यादान का सर्वोच्च पुण्य प्राप्त होता है।
२. पापों का शमन एवं मोक्ष: पूर्व जन्मों के संचित घोर पाप भस्म हो जाते हैं। जो तुलसी से श्रीहरि की पूजा करता है, उसे यमदूतों का सामना नहीं करना पड़ता और वह वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है।
३. अश्वमेध यज्ञ का फल: देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी-विवाह में यजमान बनने अथवा दर्शन मात्र से 1000 अश्वमेध यज्ञों और 100 राजसूय यज्ञों के समान पुण्य।
४. सौभाग्य एवं वास्तु दोष निवारण: जहाँ तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है, वहाँ माता लक्ष्मी का स्थायी वास, घर के वास्तु दोष नष्ट, परिवार में कलह शांत, दरिद्रता दूर और दांपत्य जीवन में माधुर्य।





