विस्तृत उत्तर
विवाह वेदी पर चढ़ाई गई समस्त सुहाग सामग्री (साड़ी, आभूषण, शृंगार सामग्री), कलश, नारियल, फल, और अन्न (गेहूँ, उड़द, मक्का, धान आदि) का दान किया जाना अनिवार्य है।
शास्त्र निर्देश देते हैं कि यह समस्त सामग्री किसी सुयोग्य ब्राह्मण दंपति को, अथवा किसी गरीब कन्या के विवाह में कन्यादान के निमित्त भेंट कर देनी चाहिए।
यदि शालिग्राम जी किसी मंदिर से लाए गए थे, तो तुलसी का पौधा, वस्त्र और समस्त दान सामग्री आदरपूर्वक उसी मंदिर में भगवान के साथ विदा कर देनी चाहिए। यह सामग्री यजमान को अपने उपयोग के लिए घर में नहीं रखनी चाहिए।
व्रतराज और अग्नि पुराण के अनुसार जो यजमान पूर्ण श्रद्धा से इस सामग्री का दान करता है, उसे स्वर्णदान, भूमिदान और गोदान के तुल्य फल प्राप्त होता है।





