उपनिषद = वेदों का अंतिम भाग (वेदांत), गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान। कुल 108 (मुक्तिकोपनिषद अनुसार), प्रमुख 10-11 (शंकराचार्य भाष्य)। सबसे महत्वपूर्ण: ईशावास्य, कठ, मांडूक्य, छांदोग्य, बृहदारण्यक। चार महावाक्य — 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'अयमात्मा ब्रह्म'।
1मुक्तिकोपनिषद में 108 उपनिषदों की सूची दी गई है — यह सर्वाधिक प्रचलित संख्या है।
2कुछ परंपराओं में 200 से अधिक उपनिषदों का उल्लेख मिलता है।
3प्रमुख (Principal) उपनिषद — 10 से 13 उपनिषदों पर शंकराचार्य ने भाष्य लिखा — ये सर्वाधिक प्रामाणिक माने जाते हैं।
4ईशावास्य (शुक्ल यजुर्वेद) — ईश्वर सर्वव्यापी, त्यागपूर्वक भोगो।