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उपनिषद क्या हैं और कितने उपनिषद हैं

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उपनिषद = वेदों का अंतिम भाग (वेदांत), गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान। कुल 108 (मुक्तिकोपनिषद अनुसार), प्रमुख 10-11 (शंकराचार्य भाष्य)। सबसे महत्वपूर्ण: ईशावास्य, कठ, मांडूक्य, छांदोग्य, बृहदारण्यक। चार महावाक्य — 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'अयमात्मा ब्रह्म'।

  1. 1मुक्तिकोपनिषद में 108 उपनिषदों की सूची दी गई है — यह सर्वाधिक प्रचलित संख्या है।
  2. 2कुछ परंपराओं में 200 से अधिक उपनिषदों का उल्लेख मिलता है।
  3. 3प्रमुख (Principal) उपनिषद — 10 से 13 उपनिषदों पर शंकराचार्य ने भाष्य लिखा — ये सर्वाधिक प्रामाणिक माने जाते हैं।
  4. 4ईशावास्य (शुक्ल यजुर्वेद) — ईश्वर सर्वव्यापी, त्यागपूर्वक भोगो।
  5. 5केन (सामवेद) — ब्रह्म को कौन जानता है?
  6. 6कठ (कृष्ण यजुर्वेद) — यम-नचिकेता संवाद, आत्मज्ञान।
  7. 7प्रश्न (अथर्ववेद) — पिप्पलाद मुनि से 6 प्रश्न।
  8. 8मुंडक (अथर्ववेद) — परा-अपरा विद्या, 'सत्यमेव जयते'।
  9. 9मांडूक्य (अथर्ववेद) — ॐकार विवेचन, चार अवस्थाएं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय)। सबसे छोटा (12 मंत्र) परंतु सबसे गहन।
  10. 10तैत्तिरीय (कृष्ण यजुर्वेद) — ब्रह्मानंद, पंचकोश विवेचन।
  11. 11ऐतरेय (ऋग्वेद) — सृष्टि उत्पत्ति, 'प्रज्ञानं ब्रह्म'।
  12. 12छांदोग्य (सामवेद) — 'तत्त्वमसि' महावाक्य, उद्दालक-श्वेतकेतु संवाद।
  13. 13बृहदारण्यक (शुक्ल यजुर्वेद) — सबसे बड़ा उपनिषद। 'अहं ब्रह्मास्मि', याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद।
  14. 14'प्रज्ञानं ब्रह्म' (ऐतरेय — ऋग्वेद)
  15. 15'अहं ब्रह्मास्मि' (बृहदारण्यक — यजुर्वेद)
  16. 16'तत्त्वमसि' (छांदोग्य — सामवेद)
  17. 17'अयमात्मा ब्रह्म' (मांडूक्य — अथर्ववेद)
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