वैदिक पूजा: यज्ञ प्रधान, वैदिक मंत्र, निराकार देवता (अग्नि, इन्द्र), ऋत्विज आवश्यक। पौराणिक पूजा: मूर्ति पूजा प्रधान, नाम मंत्र/स्तोत्र, साकार देवता (विष्णु, शिव, दुर्गा), कोई भी कर सकता है। पौराणिक में षोडशोपचार, व्रत, तीर्थ, कीर्तन। आज दोनों का मिश्रण प्रचलित है।
- 1वैदिक: यज्ञ (हवन/होम) प्रधान। अग्नि में देवताओं को आहुति देना मुख्य कर्म। वैदिक मंत्रों (ऋचाओं) का उच्चारण।
- 2पौराणिक: मूर्ति पूजा प्रधान। देवता की प्रतिमा/विग्रह की षोडशोपचार (16 उपचार) सेवा। नाम मंत्र, स्तोत्र, आरती, भजन।
- 3वैदिक: अमूर्त/निराकार देवता — इन्द्र, अग्नि, वरुण, सविता, रुद्र आदि। प्रकृति शक्तियों का देवता रूप में आह्वान।
- 4पौराणिक: साकार देवता — ब्रह्मा, विष्णु, शिव, दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश आदि। देवताओं के विस्तृत रूप, लीला, कथाएँ।
- 5वैदिक: वैदिक ऋचाएँ (संस्कृत में, विशिष्ट स्वर-उच्चारण अनिवार्य)। उदाहरण: गायत्री मंत्र, पुरुष सूक्त, श्री सूक्त।
- 6पौराणिक: नाम मंत्र (ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय), स्तोत्र, चालीसा, आरती — अपेक्षाकृत सरल।
- 7वैदिक: ऋत्विज (विशेष प्रशिक्षित पुरोहित) आवश्यक। यज्ञ विधि जटिल।
- 8पौराणिक: कोई भी श्रद्धालु स्वयं पूजा कर सकता है। सरल से जटिल तक — पंचोपचार (5 उपचार) से चतुष्षष्टि (64 उपचार) तक।
- 9वैदिक: वैदिक काल (प्राचीनतम) से चली आ रही।
- 10पौराणिक: पुराण काल और उसके बाद विकसित। मन्दिर संस्कृति और भक्ति आन्दोलन से व्यापक प्रसार।
- 11वैदिक: सन्ध्यावन्दन, अग्निहोत्र, सोमयज्ञ, राजसूय, अश्वमेध।
- 12पौराणिक: दैनिक पूजा, व्रत, तीर्थ यात्रा, कथा श्रवण, नामसंकीर्तन।
- 13वैदिक पूजा में मंत्र-यज्ञ प्रधान, उपचार कम।
- 14पौराणिक में उपचार प्रधान: पंचोपचार (गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य), षोडशोपचार (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, आरती, परिक्रमा)।