अग्नि साक्षी: सर्वोच्च (देवमुख — सब देवता पहुँचती), शाश्वत (अमर साक्षी = शाश्वत वचन), शुद्धिकारक (विवाह पवित्र), गार्हपत्य अग्नि (जीवनभर), सप्तपदी अग्नि प्रदक्षिणा। कानूनी: हिन्दू विवाह अधिनियम 1955।
- 1अग्नि = सर्वोच्च साक्षी: ऋग्वेद में अग्नि देव = देवताओं का मुख (अग्निमुख)। अग्नि में दी गई आहुति सभी देवताओं तक पहुँचती है। अग्नि साक्षी = सम्पूर्ण देवमण्डल साक्षी।
- 2शाश्वतता: अग्नि = अविनाशी, शाश्वत। अग्नि के समक्ष लिए वचन = शाश्वत — जन्म-जन्म के लिए। मनुष्य साक्षी = नश्वर, अग्नि = अमर।
- 3शुद्धि: अग्नि = सर्वोच्च शुद्धिकारक। अग्नि जो भी स्पर्श करती है, शुद्ध कर देती है। विवाह बंधन = अग्नि द्वारा शुद्ध और पवित्र।
- 4गृहस्थ अग्नि: विवाह की अग्नि = 'गार्हपत्य अग्नि' — इसे दम्पत्ति जीवनभर गृहस्थ हवन में प्रज्वलित रखते हैं (प्राचीन परम्परा)।
- 5फेरे = अग्नि प्रदक्षिणा: सात फेरे (सप्तपदी) अग्नि के चारों ओर = अग्नि देव के समक्ष सात प्रतिज्ञाएँ।